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📘 धातु-रूपावली

२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत्) या अर्थ (जाना, read) से खोजें

गल्ह् (गल्हँ)

भ्वादिगण · आत्मनेपदी · धातुपाठ 01.0724
धात्वर्थ: कुत्सायाम् — निन्दा करना (to blame,to censure)

लट् लकार वर्तमान काल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगल्हतेगल्हेतेगल्हन्ते
मध्यमगल्हसेगल्हेथेगल्हध्वे
उत्तमगल्हेगल्हावहेगल्हामहे

लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगल्हताम्गल्हेताम्गल्हन्ताम्
मध्यमगल्हस्वगल्हेथाम्गल्हध्वम्
उत्तमगल्हैगल्हावहैगल्हामहै

लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअगल्हतअगल्हेताम्अगल्हन्त
मध्यमअगल्हथाःअगल्हेथाम्अगल्हध्वम्
उत्तमअगल्हेअगल्हावहिअगल्हामहि

विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगल्हेतगल्हेयाताम्गल्हेरन्
मध्यमगल्हेथाःगल्हेयाथाम्गल्हेध्वम्
उत्तमगल्हेयगल्हेवहिगल्हेमहि

लृट् लकार सामान्य भविष्यत्

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगल्हिष्यतेगल्हिष्येतेगल्हिष्यन्ते
मध्यमगल्हिष्यसेगल्हिष्येथेगल्हिष्यध्वे
उत्तमगल्हिष्येगल्हिष्यावहेगल्हिष्यामहे

लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगल्हितागल्हितारौगल्हितारः
मध्यमगल्हितासेगल्हितासाथेगल्हिताध्वे
उत्तमगल्हिताहेगल्हितास्वहेगल्हितास्महे

लिट् लकार परोक्ष भूतकाल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमजगल्हेजगल्हातेजगल्हिरे
मध्यमजगल्हिषेजगल्हाथेजगल्हिढ्वे / जगल्हिध्वे
उत्तमजगल्हेजगल्हिवहेजगल्हिमहे

लुङ् लकार सामान्य भूतकाल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअगल्हिष्टअगल्हिषाताम्अगल्हिषत
मध्यमअगल्हिष्ठाःअगल्हिषाथाम्अगल्हिढ्वम् / अगल्हिध्वम्
उत्तमअगल्हिषिअगल्हिष्वहिअगल्हिष्महि

आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमगल्हिषीष्टगल्हिषीयास्ताम्गल्हिषीरन्
मध्यमगल्हिषीष्ठाःगल्हिषीयास्थाम्गल्हिषीढ्वम् / गल्हिषीध्वम्
उत्तमगल्हिषीयगल्हिषीवहिगल्हिषीमहि

लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअगल्हिष्यतअगल्हिष्येताम्अगल्हिष्यन्त
मध्यमअगल्हिष्यथाःअगल्हिष्येथाम्अगल्हिष्यध्वम्
उत्तमअगल्हिष्येअगल्हिष्यावहिअगल्हिष्यामहि

ⓘ धातुपाठ व धातुरूप-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (मुक्त डेटा)। कुछ धातुओं के वैकल्पिक/वैदिक रूप "/" से दिखाये गये हैं। शब्दों के रूप हेतु शब्द-रूपावली, श्लोक-विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।

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