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📘 धातु-रूपावली

२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत्) या अर्थ (जाना, read) से खोजें

बल्ह् (बल्हँ)

भ्वादिगण · आत्मनेपदी · धातुपाठ 01.0726
धात्वर्थ: प्राधान्ये — श्रेष्ठ होना (to be eminent, to be superior)

लट् लकार वर्तमान काल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमबल्हतेबल्हेतेबल्हन्ते
मध्यमबल्हसेबल्हेथेबल्हध्वे
उत्तमबल्हेबल्हावहेबल्हामहे

लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमबल्हताम्बल्हेताम्बल्हन्ताम्
मध्यमबल्हस्वबल्हेथाम्बल्हध्वम्
उत्तमबल्हैबल्हावहैबल्हामहै

लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअबल्हतअबल्हेताम्अबल्हन्त
मध्यमअबल्हथाःअबल्हेथाम्अबल्हध्वम्
उत्तमअबल्हेअबल्हावहिअबल्हामहि

विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमबल्हेतबल्हेयाताम्बल्हेरन्
मध्यमबल्हेथाःबल्हेयाथाम्बल्हेध्वम्
उत्तमबल्हेयबल्हेवहिबल्हेमहि

लृट् लकार सामान्य भविष्यत्

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमबल्हिष्यतेबल्हिष्येतेबल्हिष्यन्ते
मध्यमबल्हिष्यसेबल्हिष्येथेबल्हिष्यध्वे
उत्तमबल्हिष्येबल्हिष्यावहेबल्हिष्यामहे

लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमबल्हिताबल्हितारौबल्हितारः
मध्यमबल्हितासेबल्हितासाथेबल्हिताध्वे
उत्तमबल्हिताहेबल्हितास्वहेबल्हितास्महे

लिट् लकार परोक्ष भूतकाल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमबबल्हेबबल्हातेबबल्हिरे
मध्यमबबल्हिषेबबल्हाथेबबल्हिढ्वे / बबल्हिध्वे
उत्तमबबल्हेबबल्हिवहेबबल्हिमहे

लुङ् लकार सामान्य भूतकाल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअबल्हिष्टअबल्हिषाताम्अबल्हिषत
मध्यमअबल्हिष्ठाःअबल्हिषाथाम्अबल्हिढ्वम् / अबल्हिध्वम्
उत्तमअबल्हिषिअबल्हिष्वहिअबल्हिष्महि

आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमबल्हिषीष्टबल्हिषीयास्ताम्बल्हिषीरन्
मध्यमबल्हिषीष्ठाःबल्हिषीयास्थाम्बल्हिषीढ्वम् / बल्हिषीध्वम्
उत्तमबल्हिषीयबल्हिषीवहिबल्हिषीमहि

लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमअबल्हिष्यतअबल्हिष्येताम्अबल्हिष्यन्त
मध्यमअबल्हिष्यथाःअबल्हिष्येथाम्अबल्हिष्यध्वम्
उत्तमअबल्हिष्येअबल्हिष्यावहिअबल्हिष्यामहि

ⓘ धातुपाठ व धातुरूप-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (मुक्त डेटा)। कुछ धातुओं के वैकल्पिक/वैदिक रूप "/" से दिखाये गये हैं। शब्दों के रूप हेतु शब्द-रूपावली, श्लोक-विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।

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