२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत्) या अर्थ (जाना, read) से खोजें
ऊह् (ऊहँ)
भ्वादिगण · आत्मनेपदी · धातुपाठ 01.0735
धात्वर्थ: वितर्के — तर्क करना, कल्पना करना (to conjecture,to infer,to guess, to reason, to imagine, to hypothesize)
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊहते
ऊहेते
ऊहन्ते
मध्यम
ऊहसे
ऊहेथे
ऊहध्वे
उत्तम
ऊहे
ऊहावहे
ऊहामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊहताम्
ऊहेताम्
ऊहन्ताम्
मध्यम
ऊहस्व
ऊहेथाम्
ऊहध्वम्
उत्तम
ऊहै
ऊहावहै
ऊहामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
औहत
औहेताम्
औहन्त
मध्यम
औहथाः
औहेथाम्
औहध्वम्
उत्तम
औहे
औहावहि
औहामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊहेत
ऊहेयाताम्
ऊहेरन्
मध्यम
ऊहेथाः
ऊहेयाथाम्
ऊहेध्वम्
उत्तम
ऊहेय
ऊहेवहि
ऊहेमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊहिष्यते
ऊहिष्येते
ऊहिष्यन्ते
मध्यम
ऊहिष्यसे
ऊहिष्येथे
ऊहिष्यध्वे
उत्तम
ऊहिष्ये
ऊहिष्यावहे
ऊहिष्यामहे
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊहिता
ऊहितारौ
ऊहितारः
मध्यम
ऊहितासे
ऊहितासाथे
ऊहिताध्वे
उत्तम
ऊहिताहे
ऊहितास्वहे
ऊहितास्महे
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊहाञ्चक्रे / ऊहामास / ऊहाम्बभूव
ऊहाञ्चक्राते / ऊहामासतुः / ऊहाम्बभूवतुः
ऊहाञ्चक्रिरे / ऊहामासुः / ऊहाम्बभूवुः
मध्यम
ऊहाञ्चकृषे / ऊहामासिथ / ऊहाम्बभूविथ
ऊहाञ्चक्राथे / ऊहामासथुः / ऊहाम्बभूवथुः
ऊहाञ्चकृढ्वे / ऊहामास / ऊहाम्बभूव
उत्तम
ऊहाञ्चक्रे / ऊहामास / ऊहाम्बभूव
ऊहाञ्चकृवहे / ऊहामासिव / ऊहाम्बभूविव
ऊहाञ्चकृमहे / ऊहामासिम / ऊहाम्बभूविम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
औहिष्ट
औहिषाताम्
औहिषत
मध्यम
औहिष्ठाः
औहिषाथाम्
औहिढ्वम् / औहिध्वम्
उत्तम
औहिषि
औहिष्वहि
औहिष्महि
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊहिषीष्ट
ऊहिषीयास्ताम्
ऊहिषीरन्
मध्यम
ऊहिषीष्ठाः
ऊहिषीयास्थाम्
ऊहिषीढ्वम् / ऊहिषीध्वम्
उत्तम
ऊहिषीय
ऊहिषीवहि
ऊहिषीमहि
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
औहिष्यत
औहिष्येताम्
औहिष्यन्त
मध्यम
औहिष्यथाः
औहिष्येथाम्
औहिष्यध्वम्
उत्तम
औहिष्ये
औहिष्यावहि
औहिष्यामहि
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊह्यते
ऊह्येते
ऊह्यन्ते
मध्यम
ऊह्यसे
ऊह्येथे
ऊह्यध्वे
उत्तम
ऊह्ये
ऊह्यावहे
ऊह्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊह्यताम्
ऊह्येताम्
ऊह्यन्ताम्
मध्यम
ऊह्यस्व
ऊह्येथाम्
ऊह्यध्वम्
उत्तम
ऊह्यै
ऊह्यावहै
ऊह्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
औह्यत
औह्येताम्
औह्यन्त
मध्यम
औह्यथाः
औह्येथाम्
औह्यध्वम्
उत्तम
औह्ये
औह्यावहि
औह्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊह्येत
ऊह्येयाताम्
ऊह्येरन्
मध्यम
ऊह्येथाः
ऊह्येयाथाम्
ऊह्येध्वम्
उत्तम
ऊह्येय
ऊह्येवहि
ऊह्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
ऊहिष्यते
ऊहिष्येते
ऊहिष्यन्ते
मध्यम
ऊहिष्यसे
ऊहिष्येथे
ऊहिष्यध्वे
उत्तम
ऊहिष्ये
ऊहिष्यावहे
ऊहिष्यामहे
प्रत्यय
प्रयोग / अर्थ
प्रातिपदिक / अव्यय
पुंलिङ्ग
स्त्रीलिङ्ग
नपुंसकलिङ्ग
ल्युट्
भाववाचक/करणवाचक कृदन्त
ऊहन
—
—
ऊहनम्
ण्वुल्
कर्तृवाचक कृदन्त
ऊहक
ऊहकः
ऊहिका
ऊहकम्
तृच्
कर्तृवाचक कृदन्त
ऊहितृ
ऊहिता
ऊहित्री
ऊहितृ
ण्यत्
विध्यर्थक कृदन्त
ऊह्य
ऊह्यः
ऊह्या
ऊह्यम्
तव्य
विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए)
ऊहितव्य
ऊहितव्यः
ऊहितव्या
ऊहितव्यम्
अनीयर्
विध्यर्थक कृदन्त
ऊहनीय
ऊहनीयः
ऊहनीया
ऊहनीयम्
क्त
भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा)
ऊहित
ऊहितः
ऊहिता
ऊहितम्
क्तवतु
भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा)
ऊहितवत्
ऊहितवान्
ऊहितवती
ऊहितवत् / ऊहितवद्
शानच्
वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद)
ऊहमान
ऊहमानः
ऊहमाना
ऊहमानम्
क्त्वा
पूर्वकालिक अव्यय (करके)
ऊहित्वा
—
—
—
ल्यप्
पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके)
प्रोह्य
—
—
—
तुमुन्
निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए)
ऊहितुम्
—
—
—
णमुल्
पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय
ऊहम्
—
—
—
घञ्
भाववाचक कृदन्त
ऊह
ऊहः
—
—
क्तिन्
भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त
ऊढि
—
ऊढिः
—
क्वसु
भूतकालिक (लिट्) कृदन्त
ऊहाम्बभूवस्
ऊहाम्बभूवान्
ऊहाम्बभूषी
ऊहाम्बभूवत् / ऊहाम्बभूवद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।
ⓘ धातुपाठ व धातुरूप-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (मुक्त डेटा)। कुछ धातुओं के वैकल्पिक/वैदिक रूप "/" से दिखाये गये हैं। शब्दों के रूप हेतु शब्द-रूपावली, श्लोक-विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।