२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत्) या अर्थ (जाना, read) से खोजें
रुच् (रुचँ)
भ्वादिगण · आत्मनेपदी · धातुपाठ 01.0847
धात्वर्थ: दीप्तावभिप्रीतौ च — चमकना, प्रकाशित होना, आनन्द करना, प्रसन्न होना, उत्साह करना, रुचना (to shine, to glow, to please, to like, to enjoy)
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
अरुचत् / अरुचद्
अरुचताम्
अरुचन्
मध्यम
अरुचः
अरुचतम्
अरुचत
उत्तम
अरुचम्
अरुचाव
अरुचाम
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रोचते
रोचेते
रोचन्ते
मध्यम
रोचसे
रोचेथे
रोचध्वे
उत्तम
रोचे
रोचावहे
रोचामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रोचताम्
रोचेताम्
रोचन्ताम्
मध्यम
रोचस्व
रोचेथाम्
रोचध्वम्
उत्तम
रोचै
रोचावहै
रोचामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
अरोचत
अरोचेताम्
अरोचन्त
मध्यम
अरोचथाः
अरोचेथाम्
अरोचध्वम्
उत्तम
अरोचे
अरोचावहि
अरोचामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रोचेत
रोचेयाताम्
रोचेरन्
मध्यम
रोचेथाः
रोचेयाथाम्
रोचेध्वम्
उत्तम
रोचेय
रोचेवहि
रोचेमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रोचिष्यते
रोचिष्येते
रोचिष्यन्ते
मध्यम
रोचिष्यसे
रोचिष्येथे
रोचिष्यध्वे
उत्तम
रोचिष्ये
रोचिष्यावहे
रोचिष्यामहे
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रोचिता
रोचितारौ
रोचितारः
मध्यम
रोचितासे
रोचितासाथे
रोचिताध्वे
उत्तम
रोचिताहे
रोचितास्वहे
रोचितास्महे
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रुरुचे
रुरुचाते
रुरुचिरे
मध्यम
रुरुचिषे
रुरुचाथे
रुरुचिध्वे
उत्तम
रुरुचे
रुरुचिवहे
रुरुचिमहे
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
अरोचिष्ट
अरोचिषाताम्
अरोचिषत
मध्यम
अरोचिष्ठाः
अरोचिषाथाम्
अरोचिध्वम्
उत्तम
अरोचिषि
अरोचिष्वहि
अरोचिष्महि
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रोचिषीष्ट
रोचिषीयास्ताम्
रोचिषीरन्
मध्यम
रोचिषीष्ठाः
रोचिषीयास्थाम्
रोचिषीध्वम्
उत्तम
रोचिषीय
रोचिषीवहि
रोचिषीमहि
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
अरोचिष्यत
अरोचिष्येताम्
अरोचिष्यन्त
मध्यम
अरोचिष्यथाः
अरोचिष्येथाम्
अरोचिष्यध्वम्
उत्तम
अरोचिष्ये
अरोचिष्यावहि
अरोचिष्यामहि
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रुच्यते
रुच्येते
रुच्यन्ते
मध्यम
रुच्यसे
रुच्येथे
रुच्यध्वे
उत्तम
रुच्ये
रुच्यावहे
रुच्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रुच्यताम्
रुच्येताम्
रुच्यन्ताम्
मध्यम
रुच्यस्व
रुच्येथाम्
रुच्यध्वम्
उत्तम
रुच्यै
रुच्यावहै
रुच्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
अरुच्यत
अरुच्येताम्
अरुच्यन्त
मध्यम
अरुच्यथाः
अरुच्येथाम्
अरुच्यध्वम्
उत्तम
अरुच्ये
अरुच्यावहि
अरुच्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रुच्येत
रुच्येयाताम्
रुच्येरन्
मध्यम
रुच्येथाः
रुच्येयाथाम्
रुच्येध्वम्
उत्तम
रुच्येय
रुच्येवहि
रुच्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष
एकवचन
द्विवचन
बहुवचन
प्रथम
रोचिष्यते
रोचिष्येते
रोचिष्यन्ते
मध्यम
रोचिष्यसे
रोचिष्येथे
रोचिष्यध्वे
उत्तम
रोचिष्ये
रोचिष्यावहे
रोचिष्यामहे
प्रत्यय
प्रयोग / अर्थ
प्रातिपदिक / अव्यय
पुंलिङ्ग
स्त्रीलिङ्ग
नपुंसकलिङ्ग
ल्युट्
भाववाचक/करणवाचक कृदन्त
रोचन
—
—
रोचनम्
ण्वुल्
कर्तृवाचक कृदन्त
रोचक
रोचकः
रोचिका
रोचकम्
तृच्
कर्तृवाचक कृदन्त
रोचितृ
रोचिता
रोचित्री
रोचितृ
ण्यत्
विध्यर्थक कृदन्त
रोच्य
रोच्यः
रोच्या
रोच्यम्
तव्य
विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए)
रोचितव्य
रोचितव्यः
रोचितव्या
रोचितव्यम्
अनीयर्
विध्यर्थक कृदन्त
रोचनीय
रोचनीयः
रोचनीया
रोचनीयम्
क्त
भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा)
रुचित
रुचितः
रुचिता
रुचितम्
क्तवतु
भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा)
रुचितवत्
रुचितवान्
रुचितवती
रुचितवत् / रुचितवद्
शानच्
वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद)
रोचमान
रोचमानः
रोचमाना
रोचमानम्
क्त्वा
पूर्वकालिक अव्यय (करके)
रुचित्वा
—
—
—
ल्यप्
पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके)
प्ररुच्य
—
—
—
तुमुन्
निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए)
रोचितुम्
—
—
—
णमुल्
पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय
रोचम्
—
—
—
घञ्
भाववाचक कृदन्त
रोक
रोकः
—
—
क्तिन्
भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त
रुक्ति
—
रुक्तिः
—
क्वसु
भूतकालिक (लिट्) कृदन्त
रुरुच्वस्
रुरुच्वान्
रुरुचुषी
रुरुच्वत् / रुरुच्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।
ⓘ धातुपाठ व धातुरूप-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (मुक्त डेटा)। कुछ धातुओं के वैकल्पिक/वैदिक रूप "/" से दिखाये गये हैं। शब्दों के रूप हेतु शब्द-रूपावली, श्लोक-विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।