२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
रुङ्ग् (रुगिँ)
भ्वादिगण · परस्मैपदी · धातुपाठ 01.0945
धात्वर्थ: वर्जने — त्याग देना, छोड़ देना (to abandon,to desert, to leave)
कर्तरि — परस्मैपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुङ्गति रुङ्गतः रुङ्गन्ति मध्यम रुङ्गसि रुङ्गथः रुङ्गथ उत्तम रुङ्गामि रुङ्गावः रुङ्गामः
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुङ्गतात् / रुङ्गताद् / रुङ्गतु रुङ्गताम् रुङ्गन्तु मध्यम रुङ्ग / रुङ्गतात् / रुङ्गताद् रुङ्गतम् रुङ्गत उत्तम रुङ्गाणि रुङ्गाव रुङ्गाम
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अरुङ्गत् / अरुङ्गद् अरुङ्गताम् अरुङ्गन् मध्यम अरुङ्गः अरुङ्गतम् अरुङ्गत उत्तम अरुङ्गम् अरुङ्गाव अरुङ्गाम
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुङ्गेत् / रुङ्गेद् रुङ्गेताम् रुङ्गेयुः मध्यम रुङ्गेः रुङ्गेतम् रुङ्गेत उत्तम रुङ्गेयम् रुङ्गेव रुङ्गेम
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुङ्गिष्यति रुङ्गिष्यतः रुङ्गिष्यन्ति मध्यम रुङ्गिष्यसि रुङ्गिष्यथः रुङ्गिष्यथ उत्तम रुङ्गिष्यामि रुङ्गिष्यावः रुङ्गिष्यामः
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुङ्गिता रुङ्गितारौ रुङ्गितारः मध्यम रुङ्गितासि रुङ्गितास्थः रुङ्गितास्थ उत्तम रुङ्गितास्मि रुङ्गितास्वः रुङ्गितास्मः
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुरुङ्ग रुरुङ्गतुः रुरुङ्गुः मध्यम रुरुङ्गिथ रुरुङ्गथुः रुरुङ्ग उत्तम रुरुङ्ग रुरुङ्गिव रुरुङ्गिम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अरुङ्गीत् / अरुङ्गीद् अरुङ्गिष्टाम् अरुङ्गिषुः मध्यम अरुङ्गीः अरुङ्गिष्टम् अरुङ्गिष्ट उत्तम अरुङ्गिषम् अरुङ्गिष्व अरुङ्गिष्म
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुङ्ग्यात् / रुङ्ग्याद् रुङ्ग्यास्ताम् रुङ्ग्यासुः मध्यम रुङ्ग्याः रुङ्ग्यास्तम् रुङ्ग्यास्त उत्तम रुङ्ग्यासम् रुङ्ग्यास्व रुङ्ग्यास्म
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अरुङ्गिष्यत् / अरुङ्गिष्यद् अरुङ्गिष्यताम् अरुङ्गिष्यन् मध्यम अरुङ्गिष्यः अरुङ्गिष्यतम् अरुङ्गिष्यत उत्तम अरुङ्गिष्यम् अरुङ्गिष्याव अरुङ्गिष्याम
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुङ्ग्यते रुङ्ग्येते रुङ्ग्यन्ते मध्यम रुङ्ग्यसे रुङ्ग्येथे रुङ्ग्यध्वे उत्तम रुङ्ग्ये रुङ्ग्यावहे रुङ्ग्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुङ्ग्यताम् रुङ्ग्येताम् रुङ्ग्यन्ताम् मध्यम रुङ्ग्यस्व रुङ्ग्येथाम् रुङ्ग्यध्वम् उत्तम रुङ्ग्यै रुङ्ग्यावहै रुङ्ग्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अरुङ्ग्यत अरुङ्ग्येताम् अरुङ्ग्यन्त मध्यम अरुङ्ग्यथाः अरुङ्ग्येथाम् अरुङ्ग्यध्वम् उत्तम अरुङ्ग्ये अरुङ्ग्यावहि अरुङ्ग्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुङ्ग्येत रुङ्ग्येयाताम् रुङ्ग्येरन् मध्यम रुङ्ग्येथाः रुङ्ग्येयाथाम् रुङ्ग्येध्वम् उत्तम रुङ्ग्येय रुङ्ग्येवहि रुङ्ग्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम रुङ्गिष्यते रुङ्गिष्येते रुङ्गिष्यन्ते मध्यम रुङ्गिष्यसे रुङ्गिष्येथे रुङ्गिष्यध्वे उत्तम रुङ्गिष्ये रुङ्गिष्यावहे रुङ्गिष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त रुङ्गण — — रुङ्गणम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त रुङ्गक रुङ्गकः रुङ्गिका रुङ्गकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त रुङ्गितृ रुङ्गिता रुङ्गित्री रुङ्गितृ
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त रुङ्ग्य रुङ्ग्यः रुङ्ग्या रुङ्ग्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) रुङ्गितव्य रुङ्गितव्यः रुङ्गितव्या रुङ्गितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त रुङ्गणीय रुङ्गणीयः रुङ्गणीया रुङ्गणीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) रुङ्गित रुङ्गितः रुङ्गिता रुङ्गितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) रुङ्गितवत् रुङ्गितवान् रुङ्गितवती रुङ्गितवत् / रुङ्गितवद्
शतृ वर्तमानकालिक कृदन्त (परस्मैपद) रुङ्गत् रुङ्गन् रुङ्गन्ती रुङ्गत् / रुङ्गद्
स्य-शतृ भविष्यत्कालिक कृदन्त रुङ्गिष्यत् रुङ्गिष्यन् रुङ्गिष्यती / रुङ्गिष्यन्ती रुङ्गिष्यत् / रुङ्गिष्यद्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) रुङ्गित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्ररुङ्ग्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) रुङ्गितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय रुङ्गम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त रुङ्ग रुङ्गः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त रुङ्क्ति — रुङ्क्तिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त रुरुङ्ग्वस् रुरुङ्ग्वान् रुरुङ्गुषी रुरुङ्ग्वत् / रुरुङ्ग्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।