॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| विद्या | विद्या (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन (व्युत्पत्ति: विद् + क्यप्) अन्य सम्भावना: द्या (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: वि + द्यै + अच् | विद्या (पुं.) — तृतीया विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: विद् + क्यप् | द्या (पुं.) — तृतीया विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: वि + द्यै + अच् |
| ददाति | दा धातु (जुहोत्यादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: ददाता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: ददा + तल् (भाववाचक) |
| विनयं | विनय (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: विनय (पुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन | विनय (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन | नय (पुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: वि + नय् + अच् |
| विनयात् | विनय (नपुं.) — पञ्चमी विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: विनय (पुं.) — पञ्चमी विभक्ति, एकवचन | नय (पुं.) — पञ्चमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: वि + नय् + अच् |
| याति | या धातु (अदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: यात् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: या + शतृ | यात् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: या + शतृ | याती (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: या + शतृ |
| पात्रताम् | पात्रता (स्त्री.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन · तद्धित: पात्र + तल् (भाववाचक) अन्य सम्भावना: पात्रता (स्त्री.) — षष्ठी विभक्ति, बहुवचन · तद्धित: पात्र + तल् (भाववाचक) |
| पात्रत्वात् | पात्रत्व (नपुं.) — पञ्चमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: पात्र + त्व (भाववाचक) |
| धनम् | धन (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: धन (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन |
| आप्नोति | आप् धातु (स्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन |
| धनात् | धन (नपुं.) — पञ्चमी विभक्ति, एकवचन |
| धर्मं | धर्म (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: धर्म (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन | धर्म (पुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन |
| ततः | अव्ययम् अन्य सम्भावना: तत (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: तन् + क्त |
| सुखम् | सुख (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: सुख (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन | अव्यय — सुख + णमुल् (पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय) | सुख (पुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन |
विद्या ➤ ज्ञान, अवगम, शिक्षा, विज्ञान
संस्कृत: ज्ञानम्
ददाति ➤ देना, सौंपना
संस्कृत: दाने
विनयं ➤ डाला हुआ, फेंका हुआ
विनयात् ➤ डाला हुआ, फेंका हुआ
याति ➤ जाना
संस्कृत: प्रापणे
पात्रताम् ➤ पीने का बर्तन, प्याला, गिलास
पात्रत्वात् ➤ पीने का बर्तन, प्याला, गिलास
धनम् ➤ संपत्ति, दौलत, धन, निधि, रुपया
संस्कृत: द्रव्यम् · पर्याय: द्रव्य, वित्त, स्वापतेय, रिक्थ, ऋक्थ
आप्नोति ➤ व्याप्त होना, व्यापना
संस्कृत: व्याप्तौ
धनात् ➤ संपत्ति, दौलत, धन, निधि, रुपया
संस्कृत: द्रव्यम् · पर्याय: द्रव्य, वित्त, स्वापतेय, रिक्थ, ऋक्थ
धर्मं ➤ कर्तव्व, जाति, सम्प्रदाय आदि के प्रचलित आचार का पालन
संस्कृत: धर्मः · पर्याय: पुण्य, श्रेयस्, सुकृत, वृष, उपनिषद्
ततः ➤ से, वहाँ से
सुखम् ➤ प्रसन्न, आनन्दित, हर्षपूर्ण खुश
संस्कृत: आनन्दः · पर्याय: मुद्, प्रीति, प्रमद, हर्ष, प्रमोद
ⓘ यह अन्वय विभक्ति, पुरुष-वचन व वाक्य-क्रम के नियमों से स्वतः बना है — काव्यार्थ के लिए गुरु/टीका से अवश्य मिलाएँ।
विद्या = ज्ञान · ददाति = देना · विनयं = डाला हुआ · विनयात् = डाला हुआ · याति = जाना · पात्रताम् = पीने का बर्तन · पात्रत्वात् = पीने का बर्तन · धनम् = संपत्ति · आप्नोति = व्याप्त होना · धनात् = संपत्ति · धर्मं = कर्तव्व · ततः = से · सुखम् = प्रसन्न
| पदम् | विच्छेदः | सन्धि | सूत्रम् |
|---|---|---|---|
| विनयाद्याति | विनयात् + याति | जश्त्व | झलां जशोऽन्ते (८.२.३९) |
| पात्रत्वाद्धनमाप्नोति | पात्रत्वात् + धनम् | जश्त्व | झलां जशोऽन्ते (८.२.३९) |
| पात्रत्वाद्धनमाप्नोति | धनम् + आप्नोति | हल्-अच् संयोग | — |
| धनाद्धर्मं | धनात् + धर्मं | जश्त्व | झलां जशोऽन्ते (८.२.३९) |
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
विश्लेषण-समय: २.१ सेकण्ड