२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
क्ष्णु (क्ष्णु)
अदादिगण · परस्मैपदी · धातुपाठ 02.0032
धात्वर्थ: तेजने — तीक्ष्ण करना, तेज करना (to whet, to sharpen)
कर्तरि — परस्मैपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्ष्णौति क्ष्णुतः क्ष्णुवन्ति मध्यम क्ष्णौषि क्ष्णुथः क्ष्णुथ उत्तम क्ष्णौमि क्ष्णुवः क्ष्णुमः
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्ष्णुतात् / क्ष्णुताद् / क्ष्णौतु क्ष्णुताम् क्ष्णुवन्तु मध्यम क्ष्णुतात् / क्ष्णुताद् / क्ष्णुहि क्ष्णुतम् क्ष्णुत उत्तम क्ष्णवानि क्ष्णवाव क्ष्णवाम
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अक्ष्णौत् / अक्ष्णौद् अक्ष्णुताम् अक्ष्णुवन् मध्यम अक्ष्णौः अक्ष्णुतम् अक्ष्णुत उत्तम अक्ष्णवम् अक्ष्णुव अक्ष्णुम
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्ष्णुयात् / क्ष्णुयाद् क्ष्णुयाताम् क्ष्णुयुः मध्यम क्ष्णुयाः क्ष्णुयातम् क्ष्णुयात उत्तम क्ष्णुयाम् क्ष्णुयाव क्ष्णुयाम
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्ष्णविष्यति क्ष्णविष्यतः क्ष्णविष्यन्ति मध्यम क्ष्णविष्यसि क्ष्णविष्यथः क्ष्णविष्यथ उत्तम क्ष्णविष्यामि क्ष्णविष्यावः क्ष्णविष्यामः
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्ष्णविता क्ष्णवितारौ क्ष्णवितारः मध्यम क्ष्णवितासि क्ष्णवितास्थः क्ष्णवितास्थ उत्तम क्ष्णवितास्मि क्ष्णवितास्वः क्ष्णवितास्मः
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम चुक्ष्णाव चुक्ष्णुवतुः चुक्ष्णुवुः मध्यम चुक्ष्णविथ चुक्ष्णुवथुः चुक्ष्णुव उत्तम चुक्ष्णव / चुक्ष्णाव चुक्ष्णुविव चुक्ष्णुविम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अक्ष्णावीत् / अक्ष्णावीद् अक्ष्णाविष्टाम् अक्ष्णाविषुः मध्यम अक्ष्णावीः अक्ष्णाविष्टम् अक्ष्णाविष्ट उत्तम अक्ष्णाविषम् अक्ष्णाविष्व अक्ष्णाविष्म
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्ष्णूयात् / क्ष्णूयाद् क्ष्णूयास्ताम् क्ष्णूयासुः मध्यम क्ष्णूयाः क्ष्णूयास्तम् क्ष्णूयास्त उत्तम क्ष्णूयासम् क्ष्णूयास्व क्ष्णूयास्म
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अक्ष्णविष्यत् / अक्ष्णविष्यद् अक्ष्णविष्यताम् अक्ष्णविष्यन् मध्यम अक्ष्णविष्यः अक्ष्णविष्यतम् अक्ष्णविष्यत उत्तम अक्ष्णविष्यम् अक्ष्णविष्याव अक्ष्णविष्याम
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्ष्णूयते क्ष्णूयेते क्ष्णूयन्ते मध्यम क्ष्णूयसे क्ष्णूयेथे क्ष्णूयध्वे उत्तम क्ष्णूये क्ष्णूयावहे क्ष्णूयामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्ष्णूयताम् क्ष्णूयेताम् क्ष्णूयन्ताम् मध्यम क्ष्णूयस्व क्ष्णूयेथाम् क्ष्णूयध्वम् उत्तम क्ष्णूयै क्ष्णूयावहै क्ष्णूयामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अक्ष्णूयत अक्ष्णूयेताम् अक्ष्णूयन्त मध्यम अक्ष्णूयथाः अक्ष्णूयेथाम् अक्ष्णूयध्वम् उत्तम अक्ष्णूये अक्ष्णूयावहि अक्ष्णूयामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्ष्णूयेत क्ष्णूयेयाताम् क्ष्णूयेरन् मध्यम क्ष्णूयेथाः क्ष्णूयेयाथाम् क्ष्णूयेध्वम् उत्तम क्ष्णूयेय क्ष्णूयेवहि क्ष्णूयेमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम क्ष्णविष्यते / क्ष्णाविष्यते क्ष्णविष्येते / क्ष्णाविष्येते क्ष्णविष्यन्ते / क्ष्णाविष्यन्ते मध्यम क्ष्णविष्यसे / क्ष्णाविष्यसे क्ष्णविष्येथे / क्ष्णाविष्येथे क्ष्णविष्यध्वे / क्ष्णाविष्यध्वे उत्तम क्ष्णविष्ये / क्ष्णाविष्ये क्ष्णविष्यावहे / क्ष्णाविष्यावहे क्ष्णविष्यामहे / क्ष्णाविष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त क्ष्णवन — — क्ष्णवनम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त क्ष्णावक क्ष्णावकः क्ष्णाविका क्ष्णावकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त क्ष्णवितृ क्ष्णविता क्ष्णवित्री क्ष्णवितृ
यत् विध्यर्थक कृदन्त क्ष्णव्य क्ष्णव्यः क्ष्णव्या क्ष्णव्यम्
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त क्ष्णाव्य क्ष्णाव्यः क्ष्णाव्या क्ष्णाव्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) क्ष्णवितव्य क्ष्णवितव्यः क्ष्णवितव्या क्ष्णवितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त क्ष्णवनीय क्ष्णवनीयः क्ष्णवनीया क्ष्णवनीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) क्ष्णुत क्ष्णुतः क्ष्णुता क्ष्णुतम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) क्ष्णुतवत् क्ष्णुतवान् क्ष्णुतवती क्ष्णुतवत् / क्ष्णुतवद्
शतृ वर्तमानकालिक कृदन्त (परस्मैपद) क्ष्णुवत् क्ष्णुवन् क्ष्णुवती क्ष्णुवत् / क्ष्णुवद्
स्य-शतृ भविष्यत्कालिक कृदन्त क्ष्णविष्यत् क्ष्णविष्यन् क्ष्णविष्यती / क्ष्णविष्यन्ती क्ष्णविष्यत् / क्ष्णविष्यद्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) क्ष्णुत्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रक्ष्णुत्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) क्ष्णवितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय क्ष्णावम् — — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त क्ष्णुति — क्ष्णुतिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त चुक्ष्णुवस् चुक्ष्णुवान् चुक्ष्णूषी चुक्ष्णुवत् / चुक्ष्णुवद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।