२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
शुन् (शुनँ)
तुदादिगण · परस्मैपदी · धातुपाठ 06.0062
धात्वर्थ: गतौ — जाना (to go)
कर्तरि — परस्मैपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुनति शुनतः शुनन्ति मध्यम शुनसि शुनथः शुनथ उत्तम शुनामि शुनावः शुनामः
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुनतात् / शुनताद् / शुनतु शुनताम् शुनन्तु मध्यम शुन / शुनतात् / शुनताद् शुनतम् शुनत उत्तम शुनानि शुनाव शुनाम
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुनत् / अशुनद् अशुनताम् अशुनन् मध्यम अशुनः अशुनतम् अशुनत उत्तम अशुनम् अशुनाव अशुनाम
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुनेत् / शुनेद् शुनेताम् शुनेयुः मध्यम शुनेः शुनेतम् शुनेत उत्तम शुनेयम् शुनेव शुनेम
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शोनिष्यति शोनिष्यतः शोनिष्यन्ति मध्यम शोनिष्यसि शोनिष्यथः शोनिष्यथ उत्तम शोनिष्यामि शोनिष्यावः शोनिष्यामः
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शोनिता शोनितारौ शोनितारः मध्यम शोनितासि शोनितास्थः शोनितास्थ उत्तम शोनितास्मि शोनितास्वः शोनितास्मः
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुशोन शुशुनतुः शुशुनुः मध्यम शुशोनिथ शुशुनथुः शुशुन उत्तम शुशोन शुशुनिव शुशुनिम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशोनीत् / अशोनीद् अशोनिष्टाम् अशोनिषुः मध्यम अशोनीः अशोनिष्टम् अशोनिष्ट उत्तम अशोनिषम् अशोनिष्व अशोनिष्म
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुन्यात् / शुन्याद् शुन्यास्ताम् शुन्यासुः मध्यम शुन्याः शुन्यास्तम् शुन्यास्त उत्तम शुन्यासम् शुन्यास्व शुन्यास्म
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशोनिष्यत् / अशोनिष्यद् अशोनिष्यताम् अशोनिष्यन् मध्यम अशोनिष्यः अशोनिष्यतम् अशोनिष्यत उत्तम अशोनिष्यम् अशोनिष्याव अशोनिष्याम
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुन्यते शुन्येते शुन्यन्ते मध्यम शुन्यसे शुन्येथे शुन्यध्वे उत्तम शुन्ये शुन्यावहे शुन्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुन्यताम् शुन्येताम् शुन्यन्ताम् मध्यम शुन्यस्व शुन्येथाम् शुन्यध्वम् उत्तम शुन्यै शुन्यावहै शुन्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अशुन्यत अशुन्येताम् अशुन्यन्त मध्यम अशुन्यथाः अशुन्येथाम् अशुन्यध्वम् उत्तम अशुन्ये अशुन्यावहि अशुन्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शुन्येत शुन्येयाताम् शुन्येरन् मध्यम शुन्येथाः शुन्येयाथाम् शुन्येध्वम् उत्तम शुन्येय शुन्येवहि शुन्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम शोनिष्यते शोनिष्येते शोनिष्यन्ते मध्यम शोनिष्यसे शोनिष्येथे शोनिष्यध्वे उत्तम शोनिष्ये शोनिष्यावहे शोनिष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त शोनन — — शोननम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त शोनक शोनकः शोनिका शोनकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त शोनितृ शोनिता शोनित्री शोनितृ
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त शोन्य शोन्यः शोन्या शोन्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) शोनितव्य शोनितव्यः शोनितव्या शोनितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त शोननीय शोननीयः शोननीया शोननीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) शुनित शुनितः शुनिता शुनितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) शुनितवत् शुनितवान् शुनितवती शुनितवत् / शुनितवद्
शतृ वर्तमानकालिक कृदन्त (परस्मैपद) शुनत् शुनन् शुनती / शुनन्ती शुनत् / शुनद्
स्य-शतृ भविष्यत्कालिक कृदन्त शोनिष्यत् शोनिष्यन् शोनिष्यती / शोनिष्यन्ती शोनिष्यत् / शोनिष्यद्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) शुनित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रशुन्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) शोनितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय शोनम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त शोन शोनः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त शून्ति — शून्तिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त शुशुन्वस् शुशुन्वान् शुशुनुषी शुशुन्वत् / शुशुन्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।