२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
खिद् (खिदँ)
तुदादिगण · परस्मैपदी · धातुपाठ 06.0172
धात्वर्थ: परिघाते — दुःख देना, सताना (to distress, to irritate)
कर्तरि — परस्मैपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खिन्दति खिन्दतः खिन्दन्ति मध्यम खिन्दसि खिन्दथः खिन्दथ उत्तम खिन्दामि खिन्दावः खिन्दामः
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खिन्दतात् / खिन्दताद् / खिन्दतु खिन्दताम् खिन्दन्तु मध्यम खिन्द / खिन्दतात् / खिन्दताद् खिन्दतम् खिन्दत उत्तम खिन्दानि खिन्दाव खिन्दाम
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अखिन्दत् / अखिन्दद् अखिन्दताम् अखिन्दन् मध्यम अखिन्दः अखिन्दतम् अखिन्दत उत्तम अखिन्दम् अखिन्दाव अखिन्दाम
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खिन्देत् / खिन्देद् खिन्देताम् खिन्देयुः मध्यम खिन्देः खिन्देतम् खिन्देत उत्तम खिन्देयम् खिन्देव खिन्देम
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खेत्स्यति खेत्स्यतः खेत्स्यन्ति मध्यम खेत्स्यसि खेत्स्यथः खेत्स्यथ उत्तम खेत्स्यामि खेत्स्यावः खेत्स्यामः
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खेत्ता खेत्तारौ खेत्तारः मध्यम खेत्तासि खेत्तास्थः खेत्तास्थ उत्तम खेत्तास्मि खेत्तास्वः खेत्तास्मः
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम चिखेद चिखिदतुः चिखिदुः मध्यम चिखेदिथ चिखिदथुः चिखिद उत्तम चिखेद चिखिदिव चिखिदिम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अखैत्सीत् / अखैत्सीद् अखैत्ताम् अखैत्सुः मध्यम अखैत्सीः अखैत्तम् अखैत्त उत्तम अखैत्सम् अखैत्स्व अखैत्स्म
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खिद्यात् / खिद्याद् खिद्यास्ताम् खिद्यासुः मध्यम खिद्याः खिद्यास्तम् खिद्यास्त उत्तम खिद्यासम् खिद्यास्व खिद्यास्म
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अखेत्स्यत् / अखेत्स्यद् अखेत्स्यताम् अखेत्स्यन् मध्यम अखेत्स्यः अखेत्स्यतम् अखेत्स्यत उत्तम अखेत्स्यम् अखेत्स्याव अखेत्स्याम
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खिद्यते खिद्येते खिद्यन्ते मध्यम खिद्यसे खिद्येथे खिद्यध्वे उत्तम खिद्ये खिद्यावहे खिद्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खिद्यताम् खिद्येताम् खिद्यन्ताम् मध्यम खिद्यस्व खिद्येथाम् खिद्यध्वम् उत्तम खिद्यै खिद्यावहै खिद्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अखिद्यत अखिद्येताम् अखिद्यन्त मध्यम अखिद्यथाः अखिद्येथाम् अखिद्यध्वम् उत्तम अखिद्ये अखिद्यावहि अखिद्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खिद्येत खिद्येयाताम् खिद्येरन् मध्यम खिद्येथाः खिद्येयाथाम् खिद्येध्वम् उत्तम खिद्येय खिद्येवहि खिद्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम खेत्स्यते खेत्स्येते खेत्स्यन्ते मध्यम खेत्स्यसे खेत्स्येथे खेत्स्यध्वे उत्तम खेत्स्ये खेत्स्यावहे खेत्स्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त खेदन — — खेदनम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त खेदक खेदकः खेदिका खेदकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त खेत्तृ खेत्ता खेत्त्री खेत्तृ
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त खेद्य खेद्यः खेद्या खेद्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) खेत्तव्य खेत्तव्यः खेत्तव्या खेत्तव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त खेदनीय खेदनीयः खेदनीया खेदनीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) खिन्न खिन्नः खिन्ना खिन्नम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) खिन्नवत् खिन्नवान् खिन्नवती खिन्नवत् / खिन्नवद्
शतृ वर्तमानकालिक कृदन्त (परस्मैपद) खिन्दत् खिन्दन् खिन्दती / खिन्दन्ती खिन्दत् / खिन्दद्
स्य-शतृ भविष्यत्कालिक कृदन्त खेत्स्यत् खेत्स्यन् खेत्स्यती / खेत्स्यन्ती खेत्स्यत् / खेत्स्यद्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) खित्त्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रखिद्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) खेत्तुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय खेदम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त खेद खेदः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त खित्ति — खित्तिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त चिखिद्वस् चिखिद्वान् चिखिदुषी चिखिद्वत् / चिखिद्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।