२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
भर्त्स् (भर्त्सँ)
चुरादिगण · आत्मनेपदी · धातुपाठ 10.0202
धात्वर्थ: तर्जने — धिक्कारना, निन्दा करना, डराना, धुडकाना (to hate, to insult, to ignore, to blame, to criticize, to frighten)
कर्तरि — आत्मनेपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्सयते भर्त्सयेते भर्त्सयन्ते मध्यम भर्त्सयसे भर्त्सयेथे भर्त्सयध्वे उत्तम भर्त्सये भर्त्सयावहे भर्त्सयामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्सयताम् भर्त्सयेताम् भर्त्सयन्ताम् मध्यम भर्त्सयस्व भर्त्सयेथाम् भर्त्सयध्वम् उत्तम भर्त्सयै भर्त्सयावहै भर्त्सयामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अभर्त्सयत अभर्त्सयेताम् अभर्त्सयन्त मध्यम अभर्त्सयथाः अभर्त्सयेथाम् अभर्त्सयध्वम् उत्तम अभर्त्सये अभर्त्सयावहि अभर्त्सयामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्सयेत भर्त्सयेयाताम् भर्त्सयेरन् मध्यम भर्त्सयेथाः भर्त्सयेयाथाम् भर्त्सयेध्वम् उत्तम भर्त्सयेय भर्त्सयेवहि भर्त्सयेमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्सयिष्यते भर्त्सयिष्येते भर्त्सयिष्यन्ते मध्यम भर्त्सयिष्यसे भर्त्सयिष्येथे भर्त्सयिष्यध्वे उत्तम भर्त्सयिष्ये भर्त्सयिष्यावहे भर्त्सयिष्यामहे
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्सयिता भर्त्सयितारौ भर्त्सयितारः मध्यम भर्त्सयितासे भर्त्सयितासाथे भर्त्सयिताध्वे उत्तम भर्त्सयिताहे भर्त्सयितास्वहे भर्त्सयितास्महे
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्सयाञ्चक्रे / भर्त्सयामास / भर्त्सयाम्बभूव भर्त्सयाञ्चक्राते / भर्त्सयामासतुः / भर्त्सयाम्बभूवतुः भर्त्सयाञ्चक्रिरे / भर्त्सयामासुः / भर्त्सयाम्बभूवुः मध्यम भर्त्सयाञ्चकृषे / भर्त्सयामासिथ / भर्त्सयाम्बभूविथ भर्त्सयाञ्चक्राथे / भर्त्सयामासथुः / भर्त्सयाम्बभूवथुः भर्त्सयाञ्चकृढ्वे / भर्त्सयामास / भर्त्सयाम्बभूव उत्तम भर्त्सयाञ्चक्रे / भर्त्सयामास / भर्त्सयाम्बभूव भर्त्सयाञ्चकृवहे / भर्त्सयामासिव / भर्त्सयाम्बभूविव भर्त्सयाञ्चकृमहे / भर्त्सयामासिम / भर्त्सयाम्बभूविम
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अबभर्त्सत अबभर्त्सेताम् अबभर्त्सन्त मध्यम अबभर्त्सथाः अबभर्त्सेथाम् अबभर्त्सध्वम् उत्तम अबभर्त्से अबभर्त्सावहि अबभर्त्सामहि
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्सयिषीष्ट भर्त्सयिषीयास्ताम् भर्त्सयिषीरन् मध्यम भर्त्सयिषीष्ठाः भर्त्सयिषीयास्थाम् भर्त्सयिषीढ्वम् / भर्त्सयिषीध्वम् उत्तम भर्त्सयिषीय भर्त्सयिषीवहि भर्त्सयिषीमहि
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अभर्त्सयिष्यत अभर्त्सयिष्येताम् अभर्त्सयिष्यन्त मध्यम अभर्त्सयिष्यथाः अभर्त्सयिष्येथाम् अभर्त्सयिष्यध्वम् उत्तम अभर्त्सयिष्ये अभर्त्सयिष्यावहि अभर्त्सयिष्यामहि
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्स्यते भर्त्स्येते भर्त्स्यन्ते मध्यम भर्त्स्यसे भर्त्स्येथे भर्त्स्यध्वे उत्तम भर्त्स्ये भर्त्स्यावहे भर्त्स्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्स्यताम् भर्त्स्येताम् भर्त्स्यन्ताम् मध्यम भर्त्स्यस्व भर्त्स्येथाम् भर्त्स्यध्वम् उत्तम भर्त्स्यै भर्त्स्यावहै भर्त्स्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अभर्त्स्यत अभर्त्स्येताम् अभर्त्स्यन्त मध्यम अभर्त्स्यथाः अभर्त्स्येथाम् अभर्त्स्यध्वम् उत्तम अभर्त्स्ये अभर्त्स्यावहि अभर्त्स्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्स्येत भर्त्स्येयाताम् भर्त्स्येरन् मध्यम भर्त्स्येथाः भर्त्स्येयाथाम् भर्त्स्येध्वम् उत्तम भर्त्स्येय भर्त्स्येवहि भर्त्स्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम भर्त्सयिष्यते / भर्त्सिष्यते भर्त्सयिष्येते / भर्त्सिष्येते भर्त्सयिष्यन्ते / भर्त्सिष्यन्ते मध्यम भर्त्सयिष्यसे / भर्त्सिष्यसे भर्त्सयिष्येथे / भर्त्सिष्येथे भर्त्सयिष्यध्वे / भर्त्सिष्यध्वे उत्तम भर्त्सयिष्ये / भर्त्सिष्ये भर्त्सयिष्यावहे / भर्त्सिष्यावहे भर्त्सयिष्यामहे / भर्त्सिष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त भर्त्सन — — भर्त्सनम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त भर्त्सक भर्त्सकः भर्त्सिका भर्त्सकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त भर्त्सयितृ भर्त्सयिता भर्त्सयित्री भर्त्सयितृ
यत् विध्यर्थक कृदन्त भर्त्स्य भर्त्स्यः भर्त्स्या भर्त्स्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) भर्त्सयितव्य भर्त्सयितव्यः भर्त्सयितव्या भर्त्सयितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त भर्त्सनीय भर्त्सनीयः भर्त्सनीया भर्त्सनीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) भर्त्सित भर्त्सितः भर्त्सिता भर्त्सितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) भर्त्सितवत् भर्त्सितवान् भर्त्सितवती भर्त्सितवत् / भर्त्सितवद्
शानच् वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद) भर्त्सयमान भर्त्सयमानः भर्त्सयमाना भर्त्सयमानम्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) भर्त्सयित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रभर्त्स्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) भर्त्सयितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय भर्त्सम् — — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त भर्त्स्ति — भर्त्स्तिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त भर्त्सयाम्बभूवस् भर्त्सयाम्बभूवान् भर्त्सयाम्बभूषी भर्त्सयाम्बभूवत् / भर्त्सयाम्बभूवद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।