२२००+ धातुओं के दसों लकारों के रूप, कर्मणि-भावे प्रयोग व कृदन्त — धातु, क्रिया-रूप (गच्छति, अकरोत् ) या अर्थ (जाना, read ) से खोजें
घुंष् (घुषिँ)
भ्वादिगण · आत्मनेपदी · धातुपाठ 01.0740
धात्वर्थ: कान्तिकरणे — स्वच्छ करना, चमकाना, साफ करना (to cleanse, to purify)
कर्तरि — आत्मनेपद कर्मणि / भावे कृदन्त
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम घुंषते घुंषेते घुंषन्ते मध्यम घुंषसे घुंषेथे घुंषध्वे उत्तम घुंषे घुंषावहे घुंषामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम घुंषताम् घुंषेताम् घुंषन्ताम् मध्यम घुंषस्व घुंषेथाम् घुंषध्वम् उत्तम घुंषै घुंषावहै घुंषामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अघुंषत अघुंषेताम् अघुंषन्त मध्यम अघुंषथाः अघुंषेथाम् अघुंषध्वम् उत्तम अघुंषे अघुंषावहि अघुंषामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम घुंषेत घुंषेयाताम् घुंषेरन् मध्यम घुंषेथाः घुंषेयाथाम् घुंषेध्वम् उत्तम घुंषेय घुंषेवहि घुंषेमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम घुंषिष्यते घुंषिष्येते घुंषिष्यन्ते मध्यम घुंषिष्यसे घुंषिष्येथे घुंषिष्यध्वे उत्तम घुंषिष्ये घुंषिष्यावहे घुंषिष्यामहे
लुट् लकार अनद्यतन भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम घुंषिता घुंषितारौ घुंषितारः मध्यम घुंषितासे घुंषितासाथे घुंषिताध्वे उत्तम घुंषिताहे घुंषितास्वहे घुंषितास्महे
लिट् लकार परोक्ष भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम जुघुंषे जुघुंषाते जुघुंषिरे मध्यम जुघुंषिषे जुघुंषाथे जुघुंषिध्वे उत्तम जुघुंषे जुघुंषिवहे जुघुंषिमहे
लुङ् लकार सामान्य भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अघुंषिष्ट अघुंषिषाताम् अघुंषिषत मध्यम अघुंषिष्ठाः अघुंषिषाथाम् अघुंषिध्वम् उत्तम अघुंषिषि अघुंषिष्वहि अघुंषिष्महि
आशीर्लिङ् लकार आशीर्वाद
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम घुंषिषीष्ट घुंषिषीयास्ताम् घुंषिषीरन् मध्यम घुंषिषीष्ठाः घुंषिषीयास्थाम् घुंषिषीध्वम् उत्तम घुंषिषीय घुंषिषीवहि घुंषिषीमहि
लृङ् लकार क्रियातिपत्ति (हेतुहेतुमद्भूत)
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अघुंषिष्यत अघुंषिष्येताम् अघुंषिष्यन्त मध्यम अघुंषिष्यथाः अघुंषिष्येथाम् अघुंषिष्यध्वम् उत्तम अघुंषिष्ये अघुंषिष्यावहि अघुंषिष्यामहि
कर्मणि प्रयोग में क्रिया कर्म के अनुसार (सकर्मक धातु), भावे प्रयोग में सदा प्रथम पुरुष एकवचन (अकर्मक धातु) — आत्मनेपद के प्रत्यय।
लट् लकार वर्तमान काल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम घुंष्यते घुंष्येते घुंष्यन्ते मध्यम घुंष्यसे घुंष्येथे घुंष्यध्वे उत्तम घुंष्ये घुंष्यावहे घुंष्यामहे
लोट् लकार आज्ञा / प्रार्थना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम घुंष्यताम् घुंष्येताम् घुंष्यन्ताम् मध्यम घुंष्यस्व घुंष्येथाम् घुंष्यध्वम् उत्तम घुंष्यै घुंष्यावहै घुंष्यामहै
लङ् लकार अनद्यतन भूतकाल
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम अघुंष्यत अघुंष्येताम् अघुंष्यन्त मध्यम अघुंष्यथाः अघुंष्येथाम् अघुंष्यध्वम् उत्तम अघुंष्ये अघुंष्यावहि अघुंष्यामहि
विधिलिङ् लकार विधि / चाहिए / सम्भावना
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम घुंष्येत घुंष्येयाताम् घुंष्येरन् मध्यम घुंष्येथाः घुंष्येयाथाम् घुंष्येध्वम् उत्तम घुंष्येय घुंष्येवहि घुंष्येमहि
लृट् लकार सामान्य भविष्यत्
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम घुंषिष्यते घुंषिष्येते घुंषिष्यन्ते मध्यम घुंषिष्यसे घुंषिष्येथे घुंषिष्यध्वे उत्तम घुंषिष्ये घुंषिष्यावहे घुंषिष्यामहे
प्रत्यय प्रयोग / अर्थ प्रातिपदिक / अव्यय पुंलिङ्ग स्त्रीलिङ्ग नपुंसकलिङ्ग
ल्युट् भाववाचक/करणवाचक कृदन्त घुंषण — — घुंषणम्
ण्वुल् कर्तृवाचक कृदन्त घुंषक घुंषकः घुंषिका घुंषकम्
तृच् कर्तृवाचक कृदन्त घुंषितृ घुंषिता घुंषित्री घुंषितृ
ण्यत् विध्यर्थक कृदन्त घुंष्य घुंष्यः घुंष्या घुंष्यम्
तव्य विध्यर्थक कृदन्त (करना चाहिए) घुंषितव्य घुंषितव्यः घुंषितव्या घुंषितव्यम्
अनीयर् विध्यर्थक कृदन्त घुंषणीय घुंषणीयः घुंषणीया घुंषणीयम्
क्त भूतकालिक कर्मणि कृदन्त (निष्ठा) घुंषित घुंषितः घुंषिता घुंषितम्
क्तवतु भूतकालिक कर्तरि कृदन्त (निष्ठा) घुंषितवत् घुंषितवान् घुंषितवती घुंषितवत् / घुंषितवद्
शानच् वर्तमानकालिक कृदन्त (आत्मनेपद) घुंषमाण घुंषमाणः घुंषमाणा घुंषमाणम्
क्त्वा पूर्वकालिक अव्यय (करके) घुंषित्वा — — —
ल्यप् पूर्वकालिक अव्यय, उपसर्ग-सहित (करके) प्रघुंष्य — — —
तुमुन् निमित्तार्थक अव्यय (करने के लिए) घुंषितुम् — — —
णमुल् पूर्वकालिक/आभीक्ष्ण्य अव्यय घुंषम् — — —
घञ् भाववाचक कृदन्त घुंष घुंषः — —
क्तिन् भाववाचक स्त्रीलिङ्ग कृदन्त घुंष्टि — घुंष्टिः —
क्वसु भूतकालिक (लिट्) कृदन्त जुघुंष्वस् जुघुंष्वान् जुघुंषुषी जुघुंष्वत् / जुघुंष्वद्
इन कृदन्त-प्रातिपदिकों के सम्पूर्ण विभक्ति-रूप शब्द-रूपावली में देखें (जैसे क्त — भूत → पुंलिङ्ग "राम" के समान)।