॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| यदा | अव्ययम् |
| यदा | अव्ययम् |
| हि | अव्ययम् |
| धर्मस्य | धर्म (पुं.) — षष्ठी विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: धर्म (नपुं.) — षष्ठी विभक्ति, एकवचन |
| ग्लानिः | ग्लानि (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
| भवति | भू धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: भू धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन | भवत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: भू + शतृ | भवती (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन |
| भारत | भारत (पुं.) — सम्बोधन, एकवचन अन्य सम्भावना: भारत (नपुं.) — सम्बोधन, एकवचन |
| अभ्युत्थानम् | अभ्युत्थान (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: अभ्युत्थान (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन |
| अधर्मस्य | अधर्म (पुं.) — षष्ठी विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: अधर्म (नपुं.) — षष्ठी विभक्ति, एकवचन |
| तदा | अव्ययम् |
| आत्मानं | आत्मन् (पुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: आत्मन् (स्त्री.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन |
| सृजामि | सृज् धातु (तुदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन |
| अहम् | अस्मद् (त्रि.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: अह (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: अह् + अच् | अह (पुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: अह् + अच् | अह (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: अह् + अच् |
यदा ➤ जब, उस समय जब कि
यदा ➤ जब, उस समय जब कि
हि ➤ (इसका प्रयोग वाक्य के आरम्भ में कभी नहीं होता) इसके अर्थ निम्नांकित हैः- इसलिए कि, क्योंकि (तर्कसंगत युक्ति का निर्देश करना)
धर्मस्य ➤ कर्तव्व, जाति, सम्प्रदाय आदि के प्रचलित आचार का पालन
संस्कृत: वेदविहितकर्माः, आचारः, नीतिः, पुण्यम्, सोमयाजिः, स्वभावः, यमः, धर्मः · पर्याय: पुण्य, श्रेयस्, सुकृत, वृष, उपनिषद्
ग्लानिः ➤ अवसाद, क्लान्ति, थकावट
भवति ➤ होना
संस्कृत: सत्तायाम्
भारत ➤ भरत से संबन्ध रखने वाला या भरत की सन्तान
अभ्युत्थानम् ➤ सत्कारार्थ उठाना,किसी के सम्मान मे खड़े होना
संस्कृत: उत्थानपूर्वकसत्कारः · पर्याय: गौरव
अधर्मस्य ➤ बेईमानी, दुष्टता, अन्याय; अधर्मेण- अन्यायपूर्वक
तदा ➤ तब, उस समय
आत्मानं ➤ स्वयम्, आत्मा, ब्रह्मा, बुद्धि, स्वभाव, देह, धारणा / धैर्य, प्रयत्न
संस्कृत: स्वयम्, आत्मा, ब्रह्मा, बुद्धिः, स्वभावः, देहः, धृतिः, यत्नः · पर्याय: क्षेत्रज्ञ, पुरुष, भाव, स्व
सृजामि ➤ रचना करना, बनाना
संस्कृत: विसर्गे
अहम् ➤ मैं
संस्कृत: अहम्
ⓘ यह अन्वय विभक्ति, पुरुष-वचन व वाक्य-क्रम के नियमों से स्वतः बना है — काव्यार्थ के लिए गुरु/टीका से अवश्य मिलाएँ।
यदा = जब · यदा = जब · हि = (इसका प्रयोग वाक्य के आरम्भ में कभी नही… · धर्मस्य = कर्तव्व · ग्लानिः = अवसाद · भवति = होना · भारत = भरत से संबन्ध रखने वाला या भरत की सन्तान · अभ्युत्थानम् = सत्कारार्थ उठाना · अधर्मस्य = बेईमानी · तदा = तब · आत्मानं = स्वयम् · सृजामि = रचना करना · अहम् = मैं
| पदम् | विच्छेदः | सन्धि | सूत्रम् |
|---|---|---|---|
| ग्लानिर्भवति | ग्लानिः + भवति | विसर्ग → र् | ससजुषो रुः (८.२.६६) |
| अभ्युत्थानमधर्मस्य | अभ्युत्थानम् + अधर्मस्य | हल्-अच् संयोग | — |
| तदात्मानं | तदा + आत्मानं | दीर्घ | अकः सवर्णे दीर्घः (६.१.१०१) |
| सृजाम्यहम् | सृजामि + अहम् | यण् | इको यणचि (६.१.७७) |
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: १.४ सेकण्ड